Sunday, July 19, 2026

Crystal (Oscillator) का क्या काम है ?

 Symbol & Real shape

 

Crystal is an electronic component, which is used to generate clock pulse.

It is denoted by ‘X, Y, X-Tal’.

Its comes in frequency Hz, KHz, MHz mostly.

क्रिस्टल एक इलेक्ट्रॉनिक घटक है, जिसका उपयोग क्लॉक पल्स उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। इसे 'x, y, X-Tal' ​​द्वारा दर्शाया जाता है। यह ज्यादातर Hz, KHz, MHz आवृत्ति में आता है।

क्रिस्टल दो प्रकार के होते है – एक तो स्टील metal वाली और दूसरी सालिड ब्लैक कलर ( प्लास्टिक फाइबर की तरह ) की होती है। स्टील मेटल का क्रिस्टल डेस्कटॉप के मदरबोर्ड मे मिलेगा , जिसका frequency क्रिस्टल पर लिखा होता है।

सालिड प्लास्टिक फाइबर वाली क्रिस्टल लैपटॉप के मदरबोर्ड मे पाया जाता है । यह ज्यादातर SOC (System on Chip) के पास पाया जाता है और चार्जिंग जैक या IC के पास जाया जाता है।

 

Testing Crystal ( Oscillator )

Multimeter set on beep mode-

No Beep / No value = OK

Beep = Fault

 

Steel metal crystal को आप आसानी से चेक कर सकते है क्यों की इसमे 2 ही पैर होते है। लेकिन फाइबर मेटल क्रिस्टल को चेक करते समय ध्यान देना होगा। सबसे पहले आप मदरबोर्ड मे क्रिस्टल की पहचान करे और क्रिस्टल के बगल मे छोटा स बिन्दु ( Dot ) होगा । जैसे

 

ऊपर चित्र मे चार या 6 solding पॉइंट दिख रहे है । अगर क्रिस्टल पर जहा पॉइंट ( विंदु ) दिखाए दे वह वाली पॉइंट और उसके सामने वाली पॉइंट को ही चेक करना है। इस टेस्टिंग से आप क्रिस्टल खराब है या सही है सिर्फ पता लगा सकते है ।  लेकिन frequency का पता नहीं कर सकते है।

Frequency पता करने के लिए DSO (Digital oscilloscope) लेना पड़ेगा जिसकी कीमत लगभग 20 से 25 हजार होती है ।

Friday, July 17, 2026

गले में सूजन और इंफेक्शन में राहत पाए ..

दोस्तों मौसम बदलने के साथ वायरल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, जो इस समस्या को बढ़ा देता है। इससे गले में खराश, रूखापन और सांसों की दुर्गंध का भी सामना करना पड़ता है।

मौसम बदलने के साथ गले में टॉन्सिलाइटिस का होना एक आम बात है। इनमें सूजन और दर्द की समस्या बनी रहती है। 


टॉन्सिलाइटिस क्या होता है ? 

गले के दोनों तरफ मौजूद छोटे-छोटे ऊतक (lymphoid tissues) होते हैं। ये शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) का हिस्सा हैं और मुंह या नाक से आने वाले बैक्टीरिया और वायरस को पहचानने तथा उनसे लड़ने में मदद करते हैं।

टॉन्सिलाइटिस के काम - 

शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करना।

रोग पैदा करने वाले कीटाणुओं को पकड़ना और उनसे लड़ने वाली प्रतिरक्षा कोशिकाएँ बनाना।



टॉन्सिलाइटिस से समस्या - 

गर्दन की लिम्फ नोड्स में सूजन, गले में तेज दर्दबुखारनिगलने में कठिनाईटॉन्सिल का लाल और सूजा हुआ दिखना जैसी समस्या का सामना करना पद सकता है।


टॉन्सिलाइटिस से छुटकारा कैसे पाए ? 

चाय में शहद मिलाकर पीएं - 

शहद में एंटीवायरल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जिससे टॉन्सिलिटिस के कारण बनने वाले संक्रमण का इलाज करने में मदद मिलती है। ग्री टी को तैयार करके उसमें शहद को मिलाकर पीने से गले की खराश और खांसी को दूर किया जा सकता है।

आराम करें-
पर्याप्त नींद लें ताकि शरीर संक्रमण से लड़ सके।

नरम भोजन खाएँ-
खिचड़ी, दलिया, दही (यदि उससे परेशानी न हो), सूप, उबली सब्जियाँ आदि लें।
बहुत मसालेदार, तला हुआ या बहुत ठंडा भोजन कुछ लोगों में तकलीफ बढ़ा सकता है।

दूध में हल्दी मिलाएं

एंटी बैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर हल्दी से गले में बढ़ने वाली सूजन को कम किया जा सकता है। इसके लिए रात में सोने से पहले गर्म दूध में हल्दी को मिलाएं और आवश्यकतानुसार शहद डालकर मिक्स कर लें। इसका सेवन करने से गले में बढ़ने वाले सक्रमण के जोखिम को कम किया जा सकता है।


Wednesday, July 15, 2026

फ्यूज कॉम्पोनेन्ट के बारे में ...

 Symbol –



Real Shape – 



Fuse is an electronic and electrical sefty component, which is used to protect device/circuit from high voltage and overload.

It is denoted by ‘F’. and it come voltage and ampere rating like 240 volt / 5 ampere.

फ्यूज एक इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत सुरक्षा घटक है, जिसका उपयोग डिवाइस/सर्किट को उच्च वोल्टेज और ओवरलोड से बचाने के लिए किया जाता है।

इसे 'F' द्वारा दर्शाया जाता है और इसमें वोल्टेज और एम्पीयर रेटिंग होती है जैसे 240 वोल्ट / 5 एम्पीयर

इसमे भी रियल एण्ड एसयमडी टाइप के फ्यूज़ होते है SMD वाला फ्यूज़ आपको पीसी और लैपटॉप के मदरबोर्ड मे मिल जाएंगे । जिस पर यानि की फ्यूज़ पर P या F लिखा मिलेगा।

 

Testing Fuse

MM (Multimeter) को बीप मोड पर सेट करे। यदि बीप की आवाज लगातार आती है (मल्टीमीटर के तार को फ्यूज़ मे सटाकर रखने पर)  तो फ्यूज़ ठीक है। यदि बीप की आवाज नहीं आती है तो फ्यूज़ खराब है।

मदर बोर्ड में लगे Coil क्या करता है ? जाने ..

 Symbol –



Real Shape –




Coil is the wire which wrapped on a core. Core may be magnet/Iron and air. It is also known as Inductor.

It is denoted by ‘L’ and Unit Henry.

It is used to generate electromagnet field , filtering current and optimized current in the circuit.

कॉइल वह तार है जो एक कोर पर लपेटा जाता है। कोर चुंबक/लोहा और हवा हो सकता है। इसे इंडक्टर के नाम से भी जाना जाता है।

इसे 'L' और यूनिट हेनरी द्वारा दर्शाया जाता है।

इसका उपयोग विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने, सर्किट में करंट को फ़िल्टर करने और करंट को अनुकूलित करने के लिए किया जाता है।

 

नोट – Coil करंट को फ़िल्टर करता है और Capacitor वोल्टेज को फ़िल्टर करता है।

 

Coil को पहचानने का तरीका यह है की यह काले रंग का होता है और उसको L से प्रदर्शित करते है । काले रंग का SDM coil, resistance और capacitor से थोड़ा स बाद होता है।

 

Testing Coil

Multimeter को बीप मोड पर सेट कर देना है और Multimeter के दोनों तार को coil के दोनों सिरो पर लगाने पर बीप या वैल्यू आता है तो coil ठीक है ।

यदि नो बीप या कोई भी वैल्यू नहीं आता है coil खराब है।

Sunday, July 12, 2026

थकान क्यों महसूस होता है ? जाने ...

दोस्तों आज के समय में लोग पैसे के पीछे भाग रहे है। कुछ लोगो की मजबुरिया करवाती है। चाहे वह प्राइवेट सेक्टर हो या गवर्मेंट हो। जो भी जॉब करता है, वह ओवरटाइम करने में थोडा सा भी समय नहीं गवाते है। इसी व्यस्त दुनिया में रहने से हमारे शरीर को आराम नहीं मिलता है। जिससे हम लोगो को थकान जैसे कई समस्याओ का सामना करना पड़ता है। तो आज हम आपको बताएँगे की किन वजह से हमारे शरीर को थकान महसूस होता है और इस थकान को दूर करने के लिए क्या करना चाहिए।


थकान क्यों होती है?  

1 - नींद की कमी से थकान होना


अगर आप रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद नहीं लेते हैं, तो शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता है।

नींद के दौरान शरीर खुद को रिपेयर करता है और फिर से एनर्जी स्टोर करता है।

लगातार कम नींद लेने से चिड़चिड़ापन, सुस्ती और थकान महसूस हो सकती है।

वहीं देर रात तक फोन या लैपटॉप यूज करने की आदत भी नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

नींद की कमी से होने वाली समस्या- जैसे 

थकान और कमजोरी, ध्यान और याददाश्त में कमी, मूड खराब होना, रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना, दिल की बीमारियों का खतरा, वजन बढ़ना, सिरदर्द और शरीर में दर्द, काम और पढ़ाई में प्रदर्शन खराब होना, मधुमेह (डायबिटीज़) का खतरा


2 - आयरन की कमी होना

शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए आयरन जरूरी होता है। यह शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है।

जब शरीर में आयरन की कमी होती है, तो पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है, जिससे व्यक्ति को जल्दी थकान महसूस होने लगती है।

महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है।

नींद की कमी से होने वाली समस्या- जैसे

हर समय थकान और कमजोरी, चक्कर आना, सांस फूलना, चेहरा, होंठ और नाखून पीले पड़ना, दिल की धड़कन तेज होना, बाल झड़ना, जैसे कई समस्याओं का सामना करना पद सकता है।

आयरन की कमी पूरी करने के लिए आपको हरी पत्तेदार सब्जियाँ, चना, सोयाबीन, किसमिस, मांस, मछली, अंडा, और आयरन से भरपूर भोजन करे ।

 

3- कम पानी पीना


शरीर में पानी की कमी होने से ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है और इससे शरीर के अंगों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता है।

जिसका सीधा असर एनर्जी के लेवल पर पड़ता है।

डिहाइड्रेशन की वजह से चक्कर आना, सिरदर्द और लगातार थकान रहने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

कम पानी पिने से होने वाली समस्या- जैसे

सिरदर्द, कब्ज, मांसपेशियों में ऐंठन, गुर्दे (किडनी) में पथरी, गंभीर डिहाइड्रेशन जैसे कई समस्याओं का सामना करना पद सकता है।


4 - विटामिन B12 और विटामिन D की कमी 

बता दें कि विटामिन डी हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत रखने में सहायता करता है। वहीं विटामिन B 12 शरीर में एनर्जी के उत्पादन के लिए जरूरी माना जाता है।

इसलिए समय-समय पर जांच करवाना और संतुलित डाइट लेना जरूरी है।

विटामिन D की कमी से होने वाली समस्या जैसे

हड्डियों और जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी, बार-बार थकान महसूस होना, बच्चों में हड्डियों के विकास में समस्या जैसे समस्या हो सकती है।\

विटामिन D की कमी को पूरा ऐसे करे –

सुबह की हल्की धूप, वसायुक्त मछली (जिनमें वसा की मात्रा अधिक होती है), फोर्टिफाइड दूध (जब किसी खाने की चीज में अलग से पोषक तत्व शामिल किए जाते हैं तो इन्हें फोर्टिफाइड फूड कहते हैं. ऐसे फूड में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाई जाती है और कुपोषण और एनीमिया जैसी दिक्कतों से राहत पाई जा सकती है)  

 

विटामिन B12 की कमी से होने वाली समस्या जैसे - 

थकान और कमजोरी, हाथ-पैर में झुनझुनी या सुन्नपन, चक्कर आना, जीभ में दर्द या लालपन, चलने में असंतुलन, एनीमिया (खून की कमी) जैसे समस्या हो सकती है।

विटामिन B12 की कमी को पूरा ऐसे करे –

मछली और मांस, अंडा, दूध, दही, पनीर, जैसे खाद्य सामानों का सेवन करे जिससे विटामिन B12 की कमी को पूरा किया जा सके।

 

यदि लंबे समय से थकान, हाथ-पैर में झुनझुनी, हड्डियों में दर्द या मांसपेशियों की कमजोरी बनी हुई है, तो डॉक्टर की सलाह से ही दवा का सेवन करे। क्योकि एक गलत दवा आपके दिनचर्या को नुकसान पंहुचा सकता है।

 

 



Saturday, July 11, 2026

Thermistor क्यों जरुरी

 Symbol –



Real Shape –





A Thermistor is a type of resistor whose resistance is dependent on temperature.

Basically Thermistor is use to sence temperature. It is denoted by TH, RT, NTC, and PTC.

यह capacitor की तरफ ही दिखाए देता है , लेकिन ये capacitor से साइज़ मे थोड़ा बड़ा और मोटा होता है। यह पीसी / लैपटॉप के मदरबोर्ड मे प्रयोग नहीं होता है।

थर्मिस्टर एक प्रकार का प्रतिरोधक है जिसका प्रतिरोध तापमान पर निर्भर करता है। मूल रूप से थर्मिस्टर का उपयोग तापमान को मापने के लिए किया जाता है। इसे TH, RT, NTC और PTC द्वारा दर्शाया जाता है।

Two type of Thermistor

 (a) NTC (Negative Temperature Coefficient):- NTC Thermistor का काम तापमान को ठंडा करने के लिए होता है । जैसे – AC, Fridge, ( इनके मदरबोर्ड मे प्रयोग होता है)

                       

(b) PTC (Positive Temperature Coefficient):- PTC Thermistor का काम तापमान को गर्म करने के लिए होता है। जैसे – Iron (प्रेस), Induction, आदि के मदरबोर्ड मे प्रयोग होता है।

 

 

Testing thermistor

Multimeter को बीप मोड पर सेट कर लीजिए। Multimeter के probe को लगाकर चेक करने पर बीप कर रहा है तो ठीक यदि बीप नहीं कर रहा है तो Thermistor खराब है।

इसको मदरबोर्ड मे लगे रहने पर भी चेक कर सकते है।

Friday, July 10, 2026

मल्टीमीटर के वोल्टेज के बारे में विस्तार से जाने......

 (1) Analog multimeter value approx. ( यह Multimeter पूरा सही से वैल्यू नहीं बताता है।

यह मल्टीमीटर पुराने मल्टीमीटर है इसका प्रयोग अब खत्म हो चूका है



(2) Digital multimeter – 123 – fixed ( यह multimeter सही वैल्यू बताता है। 


Digital Multimeter Probe Wire - इस मल्टीमीटर में दो तार लगाने के होते है। काले और लाल रंग का

Red (+)

Black (-)

 

Multimeter Whole

O

O

O

10 ADC

10 Ampere DC

Com/Common

Always connect black wire

VmA

AC volt, DC volt, Resistor Value, Component Value wire checking, mA current


Symbol / Range of Multimeter

V…..  :- DC Voltage checking, Like as- Cell, battery, power supply, laptop charger( लैपटॉप चार्जर के पिन का ऊपर वाला भाग – ( ऋण ) और अंदर वाला भाग + ( जोड़ ) रहेगा। इस +, - को ध्यान से लगाना है नहीं तो आपका multimeter खराब हो जाएगा।

 

V~    :- AC voltage checking

        यह AC वोल्टेज जैसे AC वायर cable, लाइट वायर जैसे तमाम ऐसी वोल्टेज के लिए किया जाता है। माना आपने लैपटॉप चार्जर लगाया और लैपटॉप चार्जर के adaptor मे करंट नहीं आ रहा है तो आप केबल को बोर्ड मे लगा कर चेक कर सकते है, लेकिन multimeter को आपको 600 पर सेट करके ही चेक करे यदि 200 पर चेक करते है तो मल्टीमेटेर खराब हो जाएगा, क्यों की AC वोल्टेज 240 वोल्ट के आस पास ही होता है यदि 200 पर रखने पर आप 200 से ज्यादा वोल्ट की सप्लाइ नहीं चेक कर सकते है।

चार्जर केबल चेक करते समय कोई भी मल्टीमीटर का तार किसी भी केबल के छेद मे लगा सकते है।

 

A….. :- DC Current checking

 DC current को चेक करने के लिए सबसे पहले हमे बैटरी को किसी dc मोटर या डीसी पंखे के काले तार ( बैटरी और पंखे/मोटर के तार ) को  जोड़ लेना है और अब मल्टीमीटर को set कर लेना है और बैटरी के + तार को और पंखे/मोटर के + ( लाल तार ) को मल्टीमीटर के दोनों तार को लगा देखेंगे तो डीसी करंट आपको दिखाए देगा।

 

:- Resistor Value Checking

आप रिज़िस्टर के वैल्यू को चेक कर सकते है। आपको रिज़िस्टर पर दिए गए कलर कोडिंग की मदद से भी रिज़िस्टर की वैल्यू का पता कर सकते है या फिर buzzer मोड ( जहा वाईफाई और तीर का लोगों दिया हो वह बज़र मोड होगा) पर सेट करके देख सकते है।

 

 Buzzer mode/Diode mode/Beep mode/Connectivity mode :- इस मोड पर coil (coil का symbol = L), Transformer (Symbol = T) , Transistor (Symbol = Q), Zener diode (symbol = ZD), IC (symbol = U) aur Resistance or Resistor (symbol = R, RN, VR, PR) अगर कम वैल्यू की है तो buzzer मोड पर चेक होगी यदि वैल्यू 200 से कम हो। Diode और CapacitOr (capacitor की shorting करने के लिए ) को भी buzzer मोड पर ही चेक करते है।

नोट – अगर capacitor की capacity चेक करनी हो तो capacity वाला multimeter लेनी होगी।

 

 

hEF :- इस मोड पर transistor checking

      इसको चेक करने के लिए मल्टीमीटर मे छेद दिया हुआ होता है जिसमे डालकर चेक कर सकते है।

भुत का अस्पताल

भूतों की कहानियां कल्पना के आधार पर लिखी जाती है, लेकिन कल्पना भी कुछ वास्तविकता से, अभिप्रेरित होती है| भूतिया अस्पताल एक ऐसी माँ की कहानी ...