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Sunday, August 9, 2026

भुत का अस्पताल

भूतों की कहानियां कल्पना के आधार पर लिखी जाती है, लेकिन कल्पना भी कुछ वास्तविकता से, अभिप्रेरित होती है| भूतिया अस्पताल एक ऐसी माँ की कहानी है, जिसके दुखों के सैलाब ने, कई माताओं की गोद को खतरे में डाल दिया| एक बहुत ही पिछड़ा गाँव था| वहाँ लड़कियों की आबादी साल दर साल कम होती जा रही थी| गाँव के ज़्यादातर लोग लड़का पैदा होने को गौरव मानते थे और वहीं दूसरी तरफ़, यदि किसी के घर में, कन्या पैदा हो जाए तो, उसे हीनभावना से देखने लगते थे| उसी गाँव में चार भाइयों का, एक परिवार रहता था| सभी भाइयों की शादी हो चुकी थी, लेकिन तीन भाई जो सबसे बड़े थे, उनकी औलादों में केवल लड़कियाँ ही थीं| पूरा ख़ानदान लड़के की आस लगाए बैठा था, तभी उन्हें एक दिन सबसे छोटी बहू, जिसका नाम सीमा था, उसके गर्भवती होने की ख़बर मिलती है| पूरे परिवार में खुशियों की उमंग छा जाती है | सभी लड़का पैदा होने के इंतज़ार में, छोटी बहू का ख़ूब ख्याल रखते हैं| सीमा का पति अनिल, जोकि कपड़े की दुकान चलाता था, वह भी अपने बच्चे का बेसब्री से इंतज़ार करता है| परिवार के सभी लोग जानना चाहते थे कि, सीमा के गर्भ में लड़का है, या लड़की| वह तय करते हैं कि, सीमा को गर्भ के लिंग के परीक्षण के लिए, अस्पताल ले जाना चाहिए, लेकिन सीमा बच्चे की जाँच करने के लिए, अस्पताल नहीं जाना चाहती | दरअसल सीमा पहली बार, माँ बन रही थी और उसके लिए, लड़का या लड़की दोनों ही अनमोल थे| उसे लग रहा था कि, यदि उसके गर्व में, लड़की हुई तो परिवार के सभी लोग उससे नफ़रत करने लगेंगे और वह किसी को नाराज़ नहीं करना चाहती, लेकिन अनिल सीमा को अस्पताल ले जाने के लिए मना लेता है| वह उसे विश्वास दिलाता है कि, मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि, तुम लड़के को जन्म दो या, लड़की को, बस मुझे पिता बनना है| सीमा अनिल के साथ, अस्पताल पहुँच जाती है|


अस्पताल में अनिल का एक दोस्त कंपाउंडर था और इस वजह से, लिंग परीक्षण का काम, जल्दी हो जाता है | परीक्षण की रिपोर्ट में सीमा के गर्भ में लड़की होने की पुष्टि होती है| परिवार को जैसे ही पता चलता है कि, सीमा लड़की को जन्म देने वाली है, परिवार में मातम छा जाता है| पूरा परिवार मिलकर, अनिल को समझाता है कि, “यह लड़की हमें नहीं चाहिए| वैसे भी परिवार में इतनी सारी लड़कियाँ है और अब एक और लड़की से परेशानियां बढ़ती जाएंगी”| अनिल अपने भाइयों की बात में आ जाता है और सीमा को गर्भपात करने के लिए मनाने की कोशिश करता है| लेकिन सीमा, अनिल को ग़ुस्से से चिढ़चिढ़ाते हुए कहती है, “तुम पागल हो | मैं किसी भी क़ीमत में अपनी बच्ची को नहीं मारने वाली”| सीमा और अनिल के बीच इस बात को लेकर कई दिनों तक झगड़ा चलता है | एक दिन सीमा अचानक, अपने कमरे में बेहोश हो जाती है | अनिल उसे उठाने की कोशिश करता है, लेकिन जब उसे होश नहीं आता तो, वह उसे अस्पताल ले जाता है और इलाज के बहाने, अपने दोस्त के साथ मिलकर, सीमा का गर्भपात करवा देता है और जैसे ही सीमा होश में आती है तो, उसकी दुनिया उजड़ चुकी होती है| सीमा को पता चल जाता है कि, उसकी बच्ची अब इस दुनिया में नहीं रही| सीमा टूट जाती है| उसके परिवार वालों ने ही उसकी मासूम बच्ची छीन ली| सीमा बहुत दुखी थी और उसका ग़ुस्सा बढ़ता ही जा रहा था| अचानक वह अस्पताल के कमरे में, चादर से फाँसी लगा लेती है और कुछ ही पलों के अंदर, सीमा की धड़कनें बंद हो जाती है| सीमा के परिवार को जैसे ही पता चलता है कि, सीमा ने अस्पताल में आत्महत्या कर ली है, सभी भागते हुए अस्पताल पहुँच जाते हैं| अनिल सीमा के चले जाने से बेहद दुखी होता है| उसे अंदाज़ा नहीं था कि, सीमा बच्ची के गर्भपात से इतनी दुखी हो जाएगी कि, अपनी जान ही दे दे| जो होना था, वह हो चुका था, लेकिन अब बारी, भरपाई करने की थी| सीमा के अंतिम संस्कार के तेरह दिन गुज़रते ही, अस्पताल में सीमा की भूतिया रूह की दस्तक हो जाती है| डिलेवरी वार्ड में, भर्ती सभी बच्चे, अचानक अपने अपने बिस्तर से नीचे गिरने लगते हैं| लोगों को समझ में नहीं आता कि, एक साथ सभी बच्चे, नीचे कैसे गिर गए हालाँकि, बच्चों को ज़्यादा चोट नहीं आती, लेकिन यह घटना मरीज़ों के अंदर, भूतिया डर बैठाने के लिए काफ़ी थी| इसके बाद अस्पताल में भूत होने की अफ़वाह तेज़ी से फैलने लगती है और लोग इसे, भूतिया अस्पताल कहने लगते हैं| अस्पताल में एक औरत बच्चे के जन्म के समय, आपातकालीन हालात में, एम्बुलेंस से अस्पताल पहुँचती है| औरत की हालत गंभीर थी, इसलिए उसे अस्पताल के कम्पाउंडर, तुरंत स्ट्रेचर में उठाकर ले जाने लगते हैं, लेकिन वह उनके हाथ से छूटकर, हवा में लटक जाती है| उसे ऊपर लटका देख, वहाँ मौजूद सभी डर की वजह से, इधर उधर भागने लगते हैं और कुछ ही समय में वह ऊपर से नीचे गिरती है और उसे सर में ज़ोरदार चोट लग जाती है, जिससे उसकी जान चली जाती है| एक माँ, सीमा के ग़ुस्से की भेंट चढ़ चुकी थी| अस्पताल में रहस्यमय तरीक़े से मौत, अख़बारों की सुर्खियां बन जाती है और देखते ही देखते, अस्पताल को बंद करने की बात होने लगती है, लेकिन शहर में इससे बड़ा अस्पताल, दूसरा कोई नहीं था| इस अस्पताल को शहर की, जीवन रेखा कहा जाता था, लेकिन भूतिया अस्पताल अब केवल अफ़वाहों तक ही सीमित नहीं था| इस बात को वास्तविक आधार मिल चुका था और अब लोगों को पूरा यक़ीन था कि, अस्पताल में कोई न कोई भूत तो ज़रूर है, क्योंकि कई हादसे निरंतर हो रहे थे|


अस्पताल प्रबंधन मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए, अस्पताल में झाड़ फूँक करने के लिए, एक बहुत प्रतिष्ठित ओझा को बुलाते हैं| ओझा अस्पताल के कमरे में, मंत्रों से सिद्ध किया हुआ नीबू रखकर, सीमा की रूह का पता लगा लेता है| देखते ही देखते, नीबू का कलर सुर्ख़ लाल हो जाता है| उस कमरे में मौजूद, अस्पताल के कर्मचारी, एक दूसरे का मुँह देखने लगते हैं| ओझा अस्पताल के कर्मचारियों से कहता है कि, “इस अस्पताल में एक दुखियारी माँ की आत्मा है, जिसके बच्चे का गर्भपात किया गया था, इसलिए वह इस अस्पताल में, किसी को भी माँ नहीं बनने देना चाहती”| अस्पताल प्रबंधन को सीमा के गर्भपात के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, क्योंकि वह गर्भपात अनिल और उसके कम्पाउंडर दोस्त ने, गुप्त तरीक़े से किया था| सच्चाई का पता लगाने के लिए, ओझा अपनी मंत्र शक्ति से सीमा की रूह को, सबके सामने बुला लेता है| सीमा का भूतिया साया आते ही, सभी चीज़ें इधर उधर बिखरने लगती है| टेबल कुर्सियाँ पलट जाती हैं और अचानक वह कम्पाउंडर, जिसने सीमा का गर्भपात किया था, अजीब हरकतें करने लगता है| उसके स्वर बदल जाते हैं| ओझा तुरंत उसे बालों को पकड़कर, वही बैठने को कहता है| दरअसल ओझा को पता चल चुका था कि, सीमा की आत्मा, कम्पाउण्डर के अंदर आ चुकी है| वह सीमा की रूह से पूछता है, “बताओ किसने तुम्हारा गर्भपात किया था| हम उसे क़ानूनन सजा दिलवाएंगे, लेकिन तुम इन मासूम बच्चों की हत्या मत करो”| तभी वह कम्पाउंडर जिसके अंदर सीमा की रूह समाई हुई थी, जोर जोर से अपना ही नाम लेकर चिल्लाता है| अजय और अनिल, दोनों ने मेरी बच्ची की ज़िंदगी छीनी है, लेकिन उसके लिए मेरे ससुराल का पूरा परिवार भी ज़िम्मेदार है| जब तक इन सब को इनकी गुनाहों की सजा नहीं मिलेगी, तब तक मैं इस अस्पताल में किसी को भी चैन से नहीं जीने दूंगी| अस्पताल प्रबंधन, अपने उस कम्पाउंडर का सारा बयान रिकॉर्ड कर रहा था और इसी रिकॉर्डिंग के दौरान, वह कंपाउंडर एक कैची लेकर, अपने गले में घुसेड़ देता है और तुरंत ज़मीन पर गिरकर, तड़पने लगता है| ओझा, भूतिया आत्मा का इतना विकराल रूप देखकर, कुछ पल के लिए, सहम जाता है|


तभी अस्पताल के कर्मचारी, कम्पाउंडर को तुरंत उठाकर, आपातकालीन कक्ष लाते हैं, लेकिन बदक़िस्मती से, वह अपनी मौत से लड़ने में असफल हो जाता है| सीमा ने कम्पाउंडर से तो अपना बदला ले लिया था, अब बारी थी, अनिल और उसके परिवार की| कम्पाउंडर की हत्या से, मामला पुलिस के संज्ञान में आता है और एक के बाद एक, कड़ी जुड़ाने के बाद, पुलिस अनिल और उसके परिवार के सभी सदस्यों को, सीमा के गर्भपात के जुर्म में, गिरफ़्तार कर लेती है| जिससे कहीं न कहीं सीमा की आत्मा को, थोड़ा शांति तो मिलती है और अस्पताल से सीमा की दहशत का साया ग़ायब हो जाता है और इसी के साथ ही भूतिया अस्पताल की हिंदी हॉरर स्टोरी समाप्त हो जाती है|

Tuesday, July 21, 2026

बीरबल की सबसे कीमती चीज़

प्राचीन जमाना से अकबर और बीरबल की कहानियाँ बच्चों , बड़ेबुजुर्गो को सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि जीवन जीने का सुंदरता भी सिखाते रहे हे। बीरबल की चतुराई, अकबर की जिज्ञासा और दोनों के बीच की रोचक नोकझोंक आज भी बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आती है।


बीरबल की सबसे कीमती चीज़

एक दिन सुबह अकबर ने दरबार में पूछा, “इस दुनिया में सबसे कीमती चीज़ किया है?” दरबार में मजूद हर मंत्री अलग-अलग जवाब देता रहा, कोई कहता हे सोना तो कोई कहता हीरे, पैसा, प्रतिष्ठा।

लेकिन ये सब जबाब सुनकर बीरबल मुस्कुराए और बोले, जहाँपनाजहाँ आपकी जरूरत होती है, वही चीज़ सबसे कीमती बन जाती है।

अकबर ने चौंककर पूछा, “वो कैसे?”

अकबर की प्रश्न का जबाब देते हुए बीरबल ने बोले, “प्यास में पानी हीरे से ज़्यादा कीमती लगता है, बीमारी में दवा सोने से ज़्यादा कीमती लगती है और अकेलेपन में एक सच्चा इंसान दुनिया से कीमती होता है।

बीरबल की उत्तर से अकबर बहुत ही प्रसन्न होते हुए मुस्कुराए और बोलेबीरबल तुम्हारीबात दिल को छू गई!”

सिख : सही समय पर जो चीज़ हमारी जरूरत बन जाए, वही सबसे कीमती होती है।


Monday, July 20, 2026

नाम मल्लिका, काम हैवान का

बहुत समय पहले की बात है किसी शहर में एक पति और पत्नी रहा करते थे। दोनों का एक दूसरे के सिवा और कोई नहीं था। विवाह के कई वर्षों उपरांत भी उनकी कोई संतान नहीं हुई। समय इसी प्रकार से गुजर रहा था कि अचानक एक दिन स्त्री को अपनी कोख में संतान की अनुभूति हुई और गर्भावस्था के दौरान इसको यह ससपना आया की उसको अर्जुन का फूल खानी चाहिए। आसपास वह फुल कहीं भी उपलब्ध नहीं थी। पति पत्नी एक जादूगरनी के बगीचे के समीप ही रहते थे। पत्नी के मन की बात जब पति ने सुनी तो पति ने उससे वादा किया कि वह उसके लिए अर्जुन का फुल लेकर आएगा। बगीचे में चोरी से घुसकर उसने वह फुल अपनी पत्नी के लिए तोड़ी और यह क्रम कई दिनों तक चलता रहा।


एक दिन बगीचे की मालकिन जादूगरनी ने, जिसका नाम मल्लिका था, उसे यह चोरी करते हुए देख लिया और जादूगरनी ने पति को बंधक बना लिया। पति जादूगरनी के सामने बहुत गिड़गिड़ाया और अंततः जादूगरनी एक शर्त पर वह फुल उसकी पत्नी के लिए देने के लिए राजी हो गई। शर्त यह थी कि संतान के जन्म के बाद वह उसे जादूगरनी को सौंप देगा। मायूस मन से पति ने उसकी वह बात मान ली और बच्चे के जन्म होते ही उसने जादूगरनी के हाथों अपनी पुत्री को सौंप दिया। जादूगरनी ने अत्यंत मनोयोग से उसकी पुत्री का पालन पोषण किया और उसका नाम उसी अर्जुन के फुल के नाम पर फुल रखा। फुल एक अत्यंत रूपवती कन्या के रूप में धीरे धीरे विकसित होने लगी। उसके सुनहरे बाल और अद्वितीय रूप की चर्चा आसपास की जगह पर धीमे-धीमे से फैलने लगी।

कन्या के 12 वर्ष के होते ही जादूगरनी मल्लिका ने उसको एक ऐसी मीनार में कैद कर दिया, जिसमें ना तो कोई दरवाजा था और ना चढ़ने के लिए ही कोई सीढ़ी। इसमें एक ऊंचे स्थान पर एक कमरा था, जिसमें कि केवल एक खिड़की थी. जादूगरनी अपनी जादुई शक्तियों के माध्यम से छोटी बच्ची तक पहुंचती और हर दिन उससे मिलने के लिए दिन के समय जरुर जाती। इसी प्रकार से दिन बीतने लगे वह बच्ची बड़ी होकर एक अत्यंत रूपवती स्त्री के रूप में विकसित हुई। उसके लंबे घने सुनहरे बाल इतने लंबे हो गए की बाद में जादूगरनी उनके सहारे मीनार पर चढ़कर कमरे में आने और जाने लगी। ऐसा करते वक्त वह फुल को पुकारते हुए कहती –

“फुल अपने बाल गिराओ, ताकि मैं तुम्हारे सुनहरे बालों पर चढ़कर ऊपर आ सकूं।”

समय इसी तरह से गुजरता गया और एक दिन किसी राज्य का राजकुमार घूमते घूमते उसी क्षेत्र में आ गया, जहां पर फुल उस मीनार में रहती थी। फुल की आवाज में अद्वितीय मिठास थी, जब वह गाती थी तो जैसे समय ठहर जाता था। एक दिन राजकुमार को टहलते टहलते एक मधुर आवाज़ सुनाई पड़ी। वह आवाज कहां से आ रही है यह जानने के लिए जब राजकुमार मीनार के पास गया तो उसे दिखाई पड़ा कि एक ऊंची मीनार के ऊपर कमरे में एक सुंदर रूपवती स्त्री रहती है। उसकी इस मीठी आवाज को सुनकर राजकुमार उसकी तरफ अत्यंत आकर्षित हुआ और वह अपनी उत्सुकता पर काबू नहीं रख सका। उसने मन में ठान ली कि वह इस बंद मीनार में रहने वाली स्त्री, जिसकी आवाज इतनी मधुर है, के विषय में जान के ही रहेगा। एक दिन जब दिन के समय जादूगरनी फुल से मिलने के लिए आई तो उसने जादूगरनी को वह शब्द कहते और बालों के जरिए ऊपर चढ़ते हुए देख लिया। राजकुमार ने इसी प्रकार जब रात के समय फुल को पुकारा तो उसने उसे आने के लिए मीनार के सहारे अपने बालों को लटका दिया। राजकुमार ऊपर जाकर फुल से मिला।

इस तरह राजकुमार प्रतिदिन आता और फुल से मिलने लगे और धीरे धीरे फुल और राजकुमार एक दूसरे से प्रेम करने लगे थे। दोनों ने मिलते ही एक-दूसरे को पसंद कर लिया था और वह एक दूसरे के लिए के अंतरंग सहचर बन गए। अतः राजकुमार ने फुल के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। फुल इस पर सहमत हुई और दोनों का मिलना जुलना धीमे-धीमे बढ़ने लगा। जादूगरनी मल्लिका रोज दिन के समय फुल को मिलने के लिए आया करती थी। राजकुमार और फुल ने मिलकर एक योजना बनाई कि राजकुमार द्वारा दिए गए रेशम से फुल एक सीढ़ी बनायेगी, जिससे कि वह दोनों उस जगह से भाग सकें। फुल की मूर्खता के कारण जादूगरनी मल्लिका को राजकुमार के फुल के पास आने और उसके गर्भवती हो जाने का पता चल गया। जादूगरनी मल्लिका ने फुल को मीनार से बाहर निकाल दिया और जंगली जानवरों के बीच से जंगल में विचरने को अकेला छोड़ दिया, और वह स्वयं उस मीनार के कमरे में जाकर छुप गयी। राजकुमार के चढ़ने के लिए उसने फुल के बालों को काटकर उन्हें मीनार से बाहर लटका दिया ताकि राजकुमार ऊपर चढ़ सके और उसे कोई शंका ना हो। जब राजकुमार फुल से मिलने के लिए उस रात आया तो फुल की जगह जादूगरनी को पाकर वह भयभीत हो गया और मीनार से कूद पड़ा जिससे कि नीचे पड़े काटों से उसकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई। जब राजकुमार नीचे गिरने लगा उसके हाथ में फुल के कटे हुए बाल आ गए और फुल की लंबी बालों की लट राजकुमार के साथ ही नीचे गिर गई। नीचे उतर पाने का कोई अन्य तरीका न होने के कारण जादूगरनी मल्लिका उस मीनार में फंस गई और अंततः मृत्यु को प्राप्त हुई।

अपनी आंखों और अपनी प्रेमिका को खो देने के बाद राजकुमार निराश होकर अंधा होकर जगह-जगह भटकने लगा। कई महीनों तक इस प्रकार भटकने के पश्चात वह उस क्षेत्र में जा पहुंचा जहां पर फुल बस चुकी थी। उधर फुल ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया; जिनमें एक बेटी और एक बेटा हुआ। इसी तरह कुछ समय तक एक दूसरे के विछोह में रहने के बाद अंततः दोनों उसी राज्य में एक स्थान पर मिले, और उनके मिलन से चमत्कार स्वरुप राजकुमार की दृष्टि वापस आ गई और फुल के लंबे सुनहरे बाल उसको वापस मिल गए और दोनों हंसी खुशी अपना जीवन साथ में बिताने लगे।

शिक्षा – इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि बुरे का अंत बुरा ही होता है. और विश्वास के सहारे एक दिन दुनिया में सब कुछ पाया जा सकता है. जिस तरह जादूगरनी गलत नियत से फुल को इतने साल कैद में रखती है, एक दिन उसे इसका दंड मिला और वह मारी गई.फुल ने बचपन से उम्मीद लगाई हुई थी, कि उसे एक दिन कोई बचाने आएगा उसकी खुशयाली भरी ज़िन्दगी होगी, एक दिन उसके इस विश्वास को भगवान् ने पूरा कर दिया.

भुत का अस्पताल

भूतों की कहानियां कल्पना के आधार पर लिखी जाती है, लेकिन कल्पना भी कुछ वास्तविकता से, अभिप्रेरित होती है| भूतिया अस्पताल एक ऐसी माँ की कहानी ...