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Wednesday, August 5, 2026

IC (Integrated Circuit/Chip) के काम और प्रयोग

 Real Shape –





It is small semiconductor component, which has many electronic component like Transistor, MOSFET and diode etc.

It is denoted by U, and come in number.

Note – आईसी को लगाते समय ध्यान दे की आईसी सही तरीके से लगा है की नहीं , नहीं तो मदरबोर्ड शॉर्ट/खराब होने की संभावना रहता है।

आईसी मे हल्का सा पॉइंट /बिन्दु रहता है और मदरबोर्ड मे तीर का निशान छपा होता है या फिर लाइन ( आईसी के चारों तरफ चार लाइन मे एक लाइन मोटी होती है ) होती है , जिससे यह पता चलता है की आईसी का पॉइंट / बिन्दु और मदरबोर्ड का arrow/ तीर एक ही साइड मे रहेगी।  

 

Type – there are mainly two type according to working concept

 

a) Analog IC – It work on analog waveform signal.

इसका प्रयोग amplifier, voice फ़िल्टर, सिगनल processing के लिए किया जाता है।

 

b) Digital IC – It work on digital signal

इसका प्रयोग लगभग सभी बोर्ड मे किया जाता है , लैपटॉप और डेस्कटॉप के मदरबोर्ड मे भी इसका प्रयोग किया जाता है।

 

Advantage of IC’s

a) Externally Small size

b) Lower power consumption

c) Very small weight

d) Very low cost

e) better Performance

 

Disadvantage of IC’s

a) Don’t repair IC

b) Difficult to replace on board

c) No any cool testing

 

 

 

Testing IC

IC only online check, if IC requirement biasing ok but any output according own it means faulty.

आईसी को आनलाइन टेस्टिंग या हॉट टेस्टिंग के द्वारा चेक किया जाता ह। इसको चेक करने के लिए आपको इसके वोल्ट को चेक करना पड़ेगा।

जैसे की साउन्ड पोर्ट मे (o – 3.3volt, o – 5 volt,  आता है) अगर वोल्टेज सही आता है तो साउन्ड आईसी सही है अगर वोल्टेज नहीं आता है तो साउन्ड आईसी खराब है।

Thursday, July 23, 2026

ट्रांसफार्मर के मुख्य काम

 A transformer is an electronic component that transfer electrical energy between one to another circuit through electromagnetic induction ( EMI )

Basically transformer used to increase ( UP ) and decrease ( Down ) Alternating Current.

It is denoted by T, Txfr.


ट्रांसफार्मर एक इलेक्ट्रॉनिक घटक है जो विद्युत चुम्बकीय प्रेरण (ईएमआई) के माध्यम से एक सर्किट से दूसरे सर्किट के बीच विद्युत ऊर्जा स्थानांतरित करता है। मूल रूप से ट्रांसफार्मर का उपयोग Voltage को बढ़ाने (यूपी) और घटाने (डाउन) के लिए किया जाता है। इसमे दो coil होते है, एक प्राइमेरी वाइंडिंग ( इनपुट ) और दूसरा सेकन्डेरी वाइंडिंग ( आउट्पुट ) । प्राइमेरी और सेकन्डेरी वाइंडिंग एक दूसरे से जुड़े नहीं होते है ।

इसे T, Txfr  द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

इसका प्रयोग लैपटॉप और डेस्कटॉप के मदर बोर्ड मे नहीं होता है ।

इसका प्रयोग जैसे – SMPS , inverter, आदि मे प्रयोग किया जाता है।

 

नोट- ट्रांसफॉर्मर का इनपुट सिरा आउट्पुट सिरे से कम होता है यानि इनपुट मे दो तार जाते और आउट्पुट से 3-5 तार निकलते है।

 

ट्रांसफॉर्मर दो प्रकार के होते है –

A) Stepdown:- इनपुट वोल्टेज अगर ज्यादा राहत है तो आउट्पुट वोल्टेज को कम करता है । इसका प्रयोग मोबाईल चार्जर, लैपटॉप चार्जर , SMPS आदि मे होता है।

 

B) Step Up:- इनपुट वोल्टेज कम रहने पर आउट्पुट वोल्टेज ज्यादा देता है । इसका प्रयोग इंवर्टर ,                      Stabilizerआदि मे होता है ।

 

 

Testing Transformer

Set on beep mode –

Beep/value on primary and secondary winding यानि की प्राइमेरी के वायर को चेक करे बीप / वैल्यू आनआ चाहिए और सेकन्डेरी के जितने वायर है वाइंडिंग निकला है उसमे भी बीप / वैल्यू आना चाहिए तब तो ठीक है ।अगर बीप वैल्यू नहीं आता है तो ट्रांसफॉर्मर खराब है ।

अगर प्राइमेरी का एक वायर और सेकन्डेरी का एक वायर को मल्टीमीटर मे लगाकर चेक करते है और नो बीप / नो वैल्यू आता है तब तो ट्रांसफॉर्मर ठीक है और बीप / वैल्यू आता है तो ट्रांसफॉर्मर खराब है।

 


Sunday, July 19, 2026

Crystal (Oscillator) का क्या काम है ?

 Symbol & Real shape

 

Crystal is an electronic component, which is used to generate clock pulse.

It is denoted by ‘X, Y, X-Tal’.

Its comes in frequency Hz, KHz, MHz mostly.

क्रिस्टल एक इलेक्ट्रॉनिक घटक है, जिसका उपयोग क्लॉक पल्स उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। इसे 'x, y, X-Tal' ​​द्वारा दर्शाया जाता है। यह ज्यादातर Hz, KHz, MHz आवृत्ति में आता है।

क्रिस्टल दो प्रकार के होते है – एक तो स्टील metal वाली और दूसरी सालिड ब्लैक कलर ( प्लास्टिक फाइबर की तरह ) की होती है। स्टील मेटल का क्रिस्टल डेस्कटॉप के मदरबोर्ड मे मिलेगा , जिसका frequency क्रिस्टल पर लिखा होता है।

सालिड प्लास्टिक फाइबर वाली क्रिस्टल लैपटॉप के मदरबोर्ड मे पाया जाता है । यह ज्यादातर SOC (System on Chip) के पास पाया जाता है और चार्जिंग जैक या IC के पास जाया जाता है।

 

Testing Crystal ( Oscillator )

Multimeter set on beep mode-

No Beep / No value = OK

Beep = Fault

 

Steel metal crystal को आप आसानी से चेक कर सकते है क्यों की इसमे 2 ही पैर होते है। लेकिन फाइबर मेटल क्रिस्टल को चेक करते समय ध्यान देना होगा। सबसे पहले आप मदरबोर्ड मे क्रिस्टल की पहचान करे और क्रिस्टल के बगल मे छोटा स बिन्दु ( Dot ) होगा । जैसे

 

ऊपर चित्र मे चार या 6 solding पॉइंट दिख रहे है । अगर क्रिस्टल पर जहा पॉइंट ( विंदु ) दिखाए दे वह वाली पॉइंट और उसके सामने वाली पॉइंट को ही चेक करना है। इस टेस्टिंग से आप क्रिस्टल खराब है या सही है सिर्फ पता लगा सकते है ।  लेकिन frequency का पता नहीं कर सकते है।

Frequency पता करने के लिए DSO (Digital oscilloscope) लेना पड़ेगा जिसकी कीमत लगभग 20 से 25 हजार होती है ।

Wednesday, July 15, 2026

फ्यूज कॉम्पोनेन्ट के बारे में ...

 Symbol –



Real Shape – 



Fuse is an electronic and electrical sefty component, which is used to protect device/circuit from high voltage and overload.

It is denoted by ‘F’. and it come voltage and ampere rating like 240 volt / 5 ampere.

फ्यूज एक इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत सुरक्षा घटक है, जिसका उपयोग डिवाइस/सर्किट को उच्च वोल्टेज और ओवरलोड से बचाने के लिए किया जाता है।

इसे 'F' द्वारा दर्शाया जाता है और इसमें वोल्टेज और एम्पीयर रेटिंग होती है जैसे 240 वोल्ट / 5 एम्पीयर

इसमे भी रियल एण्ड एसयमडी टाइप के फ्यूज़ होते है SMD वाला फ्यूज़ आपको पीसी और लैपटॉप के मदरबोर्ड मे मिल जाएंगे । जिस पर यानि की फ्यूज़ पर P या F लिखा मिलेगा।

 

Testing Fuse

MM (Multimeter) को बीप मोड पर सेट करे। यदि बीप की आवाज लगातार आती है (मल्टीमीटर के तार को फ्यूज़ मे सटाकर रखने पर)  तो फ्यूज़ ठीक है। यदि बीप की आवाज नहीं आती है तो फ्यूज़ खराब है।

मदर बोर्ड में लगे Coil क्या करता है ? जाने ..

 Symbol –



Real Shape –




Coil is the wire which wrapped on a core. Core may be magnet/Iron and air. It is also known as Inductor.

It is denoted by ‘L’ and Unit Henry.

It is used to generate electromagnet field , filtering current and optimized current in the circuit.

कॉइल वह तार है जो एक कोर पर लपेटा जाता है। कोर चुंबक/लोहा और हवा हो सकता है। इसे इंडक्टर के नाम से भी जाना जाता है।

इसे 'L' और यूनिट हेनरी द्वारा दर्शाया जाता है।

इसका उपयोग विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने, सर्किट में करंट को फ़िल्टर करने और करंट को अनुकूलित करने के लिए किया जाता है।

 

नोट – Coil करंट को फ़िल्टर करता है और Capacitor वोल्टेज को फ़िल्टर करता है।

 

Coil को पहचानने का तरीका यह है की यह काले रंग का होता है और उसको L से प्रदर्शित करते है । काले रंग का SDM coil, resistance और capacitor से थोड़ा स बाद होता है।

 

Testing Coil

Multimeter को बीप मोड पर सेट कर देना है और Multimeter के दोनों तार को coil के दोनों सिरो पर लगाने पर बीप या वैल्यू आता है तो coil ठीक है ।

यदि नो बीप या कोई भी वैल्यू नहीं आता है coil खराब है।

Saturday, July 11, 2026

Thermistor क्यों जरुरी

 Symbol –



Real Shape –





A Thermistor is a type of resistor whose resistance is dependent on temperature.

Basically Thermistor is use to sence temperature. It is denoted by TH, RT, NTC, and PTC.

यह capacitor की तरफ ही दिखाए देता है , लेकिन ये capacitor से साइज़ मे थोड़ा बड़ा और मोटा होता है। यह पीसी / लैपटॉप के मदरबोर्ड मे प्रयोग नहीं होता है।

थर्मिस्टर एक प्रकार का प्रतिरोधक है जिसका प्रतिरोध तापमान पर निर्भर करता है। मूल रूप से थर्मिस्टर का उपयोग तापमान को मापने के लिए किया जाता है। इसे TH, RT, NTC और PTC द्वारा दर्शाया जाता है।

Two type of Thermistor

 (a) NTC (Negative Temperature Coefficient):- NTC Thermistor का काम तापमान को ठंडा करने के लिए होता है । जैसे – AC, Fridge, ( इनके मदरबोर्ड मे प्रयोग होता है)

                       

(b) PTC (Positive Temperature Coefficient):- PTC Thermistor का काम तापमान को गर्म करने के लिए होता है। जैसे – Iron (प्रेस), Induction, आदि के मदरबोर्ड मे प्रयोग होता है।

 

 

Testing thermistor

Multimeter को बीप मोड पर सेट कर लीजिए। Multimeter के probe को लगाकर चेक करने पर बीप कर रहा है तो ठीक यदि बीप नहीं कर रहा है तो Thermistor खराब है।

इसको मदरबोर्ड मे लगे रहने पर भी चेक कर सकते है।

Friday, July 10, 2026

मल्टीमीटर के वोल्टेज के बारे में विस्तार से जाने......

 (1) Analog multimeter value approx. ( यह Multimeter पूरा सही से वैल्यू नहीं बताता है।

यह मल्टीमीटर पुराने मल्टीमीटर है इसका प्रयोग अब खत्म हो चूका है



(2) Digital multimeter – 123 – fixed ( यह multimeter सही वैल्यू बताता है। 


Digital Multimeter Probe Wire - इस मल्टीमीटर में दो तार लगाने के होते है। काले और लाल रंग का

Red (+)

Black (-)

 

Multimeter Whole

O

O

O

10 ADC

10 Ampere DC

Com/Common

Always connect black wire

VmA

AC volt, DC volt, Resistor Value, Component Value wire checking, mA current


Symbol / Range of Multimeter

V…..  :- DC Voltage checking, Like as- Cell, battery, power supply, laptop charger( लैपटॉप चार्जर के पिन का ऊपर वाला भाग – ( ऋण ) और अंदर वाला भाग + ( जोड़ ) रहेगा। इस +, - को ध्यान से लगाना है नहीं तो आपका multimeter खराब हो जाएगा।

 

V~    :- AC voltage checking

        यह AC वोल्टेज जैसे AC वायर cable, लाइट वायर जैसे तमाम ऐसी वोल्टेज के लिए किया जाता है। माना आपने लैपटॉप चार्जर लगाया और लैपटॉप चार्जर के adaptor मे करंट नहीं आ रहा है तो आप केबल को बोर्ड मे लगा कर चेक कर सकते है, लेकिन multimeter को आपको 600 पर सेट करके ही चेक करे यदि 200 पर चेक करते है तो मल्टीमेटेर खराब हो जाएगा, क्यों की AC वोल्टेज 240 वोल्ट के आस पास ही होता है यदि 200 पर रखने पर आप 200 से ज्यादा वोल्ट की सप्लाइ नहीं चेक कर सकते है।

चार्जर केबल चेक करते समय कोई भी मल्टीमीटर का तार किसी भी केबल के छेद मे लगा सकते है।

 

A….. :- DC Current checking

 DC current को चेक करने के लिए सबसे पहले हमे बैटरी को किसी dc मोटर या डीसी पंखे के काले तार ( बैटरी और पंखे/मोटर के तार ) को  जोड़ लेना है और अब मल्टीमीटर को set कर लेना है और बैटरी के + तार को और पंखे/मोटर के + ( लाल तार ) को मल्टीमीटर के दोनों तार को लगा देखेंगे तो डीसी करंट आपको दिखाए देगा।

 

:- Resistor Value Checking

आप रिज़िस्टर के वैल्यू को चेक कर सकते है। आपको रिज़िस्टर पर दिए गए कलर कोडिंग की मदद से भी रिज़िस्टर की वैल्यू का पता कर सकते है या फिर buzzer मोड ( जहा वाईफाई और तीर का लोगों दिया हो वह बज़र मोड होगा) पर सेट करके देख सकते है।

 

 Buzzer mode/Diode mode/Beep mode/Connectivity mode :- इस मोड पर coil (coil का symbol = L), Transformer (Symbol = T) , Transistor (Symbol = Q), Zener diode (symbol = ZD), IC (symbol = U) aur Resistance or Resistor (symbol = R, RN, VR, PR) अगर कम वैल्यू की है तो buzzer मोड पर चेक होगी यदि वैल्यू 200 से कम हो। Diode और CapacitOr (capacitor की shorting करने के लिए ) को भी buzzer मोड पर ही चेक करते है।

नोट – अगर capacitor की capacity चेक करनी हो तो capacity वाला multimeter लेनी होगी।

 

 

hEF :- इस मोड पर transistor checking

      इसको चेक करने के लिए मल्टीमीटर मे छेद दिया हुआ होता है जिसमे डालकर चेक कर सकते है।

Thursday, July 9, 2026

मदर बोर्ड में लगे Capacitor के काम ..

Capacitor एक इलेक्ट्रॉनिक कम्पोनन्ट है जो विद्युत आवेश (Electric charge) को इकठ्ठा करता है और विद्युत को फ़िल्टर करता है। यह डीसी वोल्टेज को इकठ्ठा करता है और AC बना कर भेजता है।

इसे C, PC, NPC से प्रदर्शित करते है।

इसे microfarad से नापा जाता है।

 


Capacitor is mostly divided into two categories.

a) Polarized Capacitor (PC)

b) Non-Polarized Capacitor (NPC)

 

 

(a) Polarized Capacitor (PC)

This type of capacitor has positive (+) and negative (-) terminal (legs)

Polarized capacitor मे real shape (legs) and SMD ( यह capacitor डायरेक्ट मदरबोर्ड मे लगी होती है) shape वाली capacitor होती है। laptop मे SMD वाली capacitor लगी होती है , जिसमे (+),(-) और बिना (+), (-) दोनों होते है। जिसकी पहचान आप capacitor के उपर रंग से कर सकते है या तो capacitor के color से होगा ( जैसे की आपका capacitor 90% काला रंग और 10% सफेद या कोइ दूसरा रंग का भी हो सकता है ) जिससे यह पता चलता है 10% वाला भाग (+) पाज़िटिव होगा और 90% वाला (-) नेगटिव होगा।




लेकिन real shape वाला इसका उल्टा होता है , 10% भाग वाला रंग नेगटिव (-) और 90% भाग वाला रंग पाज़िटिव (+) होता है। Real shape capacitor का प्रयोग पीसी के मदरबोर्ड और इलेक्ट्रॉनिक part मे होता है।

Symbol - 


Testing Polarized Capacitor - OK Condition

Set multimeter on beep mode and then check if multimeter show value Continue and just stop back 1 value. It means ok.

जब multimeter से capacitor को चेक करते समय बीप मोड/बज़र मोड पर रखते है , अगर वैल्यू बढ़कर 1 पर आकर रुक जाती है तो capacitor सही है , लेकिन अगर 1 पर आने के बाद बीप की आवाज लगातार आती है तो capacitor खराब है।

 

नोट :- Capacitor को जब भी जाँच करे तो दोनों तरफ वायर अदल बदल कर जाँच करे क्योंकि एक बार चेक करने के बाद पुनः जाँच करेंगे तो वैल्यू नहीं बताएगा , क्योंकि पहली बार capacitor  को जाँच करते है तो capacitor चार्ज हो जाता है और इसे discharge करने के लिए मीटर के वायर को बदलकर कपैसिटर के दोनों सिरे पर सटाए ।  तब जाकर capacitor discharge होगा । अगर आप मीटर का वायर बदल कर जाँच नहीं  करते है और आप दोबारा जाँच करेंगे तो वैल्यू नहीं बताएगा। discharge होने के बाद ही वैल्यू बताता है।

 

  Testing Polarized Capacitor - Faulty Condition

There are three Condition of Faulty

1) Open Condition – Nothing Show Value ( वैल्यू बढ़ेगा नहीं , ज्यों का त्यो रहेगा )

2) Short Condition – Show beep ( लगातार बीप की आवाज आएगी )

3) Leakage Condition – Show value up but not down ( वैल्यू बढ़ेगी लेकिन नीचे नहीं आएगी )


(b) Non-Polarized Capacitor

Real Shape – 

 

This Type capacitor has not Positive (+) and Negative(-) terminal (legs).

इस कपैसिटर मे (+) और (-) नहीं होता है। जहा काही भी मदरबोर्ड मे C, PC, NPC, लिखा मिले तो समझो वह कपैसिटर ही है। लैपटॉप या पीसी के मदरबोर्ड मे 95% SMD capacitor ही लगा होता है।

मदरबोर्ड मे हल्का पीला रंग के जीतने भी component दिखाई दे रहे होंगे वह सभी कपैसिटर है, और मदरबोर्ड मे लगे सबसे छोटे component जो काले रंग के है वह सभी Resister है।

 

Testing Non-Polarized Capacitor

Set multimeter on beep mode and then check if multimeter show nothing its means ok, If show beep value it means faulty.

Capacitor की जाँच के लिए सबसे पहले मल्टीमीटर को बीप मोड पर रखकर जाँच करेंगे , अगर कोई भी वैल्यू नहीं बढ़ रही है तो समझिए non polarized capacitor सही है और यदि बढ़ नहीं रही है और लगातार बीप की आवाज आ रही तो या फिर बढ़ रही भी हो तो भी non polarized capacitor खराब है।

जो कपैसिटर पैर वाला हो लेकिन उसमे (+) और (-) न हो तो वह नॉन polarized capacitor  होगा और लैपटॉप के मदरबोर्ड मे Polarized Capacitor SMD( जो कपैसिटर चिपटा होता है ) मे लगा होता है और डेस्कटॉप के मदरबोर्ड मे real shape और SMD दोनों कपैसिटर लगा होता है।

 

नोट – कोई भी component की जाँच हमेशा मदरबोर्ड से निकाल कर किया जाता है, क्योंकि मदरबोर्ड मे लगे कम्पोनन्ट की जाँच 100% सही नहीं होती है या सही नहीं बताती है।

 

नोट – डेस्कटॉप के मदरबोर्ड मे SMD वाला polarized कपैसिटर नहीं होता है , लेकिन लैपटॉप के मदरबोर्ड मे SMD वाला polarized और non polarized दोनों capacitor लगे होता है।

Non polarized कपैसिटर SMD वाला हमेशा आपको छोटा ही मिलेगा , लेकिन polarized कपैसिटर SMD वाला थोड़ा सा non polarized capacitor बड़ा रहता है।

 

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